name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> ९. विभक्तिमाला ।( सर्वेषाम् स्वस्तिर्भवतु ।सभी के लिए सुख और समृद्धि हो।") BY SUJEET SIR,9709622037,8340763695, ARARIA, BIHAR. सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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BPSC TRE 4.0 Economics MCQ | Previous Year + Expected Questions | 50 Important Questions

(BPSC TRE / Tier-4 Exam Level) दे रहा हूँ — पूरा 📊 Economics MCQ (1–50) – BPSC Level 🔥 MCQ Q1. “अर्थशास्त्र” शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया? A. एडम स्मिथ B. मार्शल C. लायनल रॉबिंस D. कीन्स 👉 Ans: A  Q2. “Wealth of Nations” पुस्तक के लेखक कौन हैं? A. कीन्स B. एडम स्मिथ C. मार्शल D. रॉबिंस 👉 Ans: B  Q3. मांग का नियम किस पर आधारित है? A. आय B. कीमत C. उत्पादन D. पूंजी 👉 Ans: B  Q4. निम्न में से कौन सा सूक्ष्म अर्थशास्त्र का भाग है? A. राष्ट्रीय आय B. मांग C. GDP D. बेरोजगारी 👉 Ans: B  Q5. “GDP” का संबंध किससे है? A. उत्पादन B. आय C. व्यय D. सभी 👉 Ans: D   Q6. भारत में RBI की स्थापना कब हुई? A. 1935 B. 1947 C. 1950 D. 1969 👉 Ans: A  Q7. “मुद्रास्फीति” का कारण क्या है? A. आपूर्ति अधिक B. मांग अधिक C. उत्पादन अधिक D. आय कम 👉 Ans: B  Q8. “राष्ट्रीय आय” की गणना में क्या शामिल है? A. उत्पादन B. आय C. व्यय D. सभी 👉 Ans: D  Q9. “बैंक दर” किससे संबंधित है? A. ऋण B. ब्याज C. बचत D. कर 👉 Ans: B   Q10. “लॉ ऑफ ड...

९. विभक्तिमाला ।( सर्वेषाम् स्वस्तिर्भवतु ।सभी के लिए सुख और समृद्धि हो।") BY SUJEET SIR,9709622037,8340763695, ARARIA, BIHAR.

९. विभक्तिमाला ।


धर्मो जयति नाधर्मः, सत्यं जयति नानृतम् ।
क्षमा जयति न क्रोधो, देवो जयति नासुरः ।। प्रथमा ।।






वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । 
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।। द्वितीया ।।






 काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् । 
व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ।। तृतीया ।।






विद्या विवादाय धनं मदाय खलस्य शक्तिः परपीडनाय । साधोस्तु सर्वं विपरीतमेतत् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ।।चतुर्थी।।



 तैलाद्रक्षेद् जलाद्रक्षेद् रक्षेत् शिथिलबन्धनात् । 
मूर्खहस्ते न दातव्यम् एवं वदति पुस्तकम् ।। पञ्चमी ।।






नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुणः । 
गुणस्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा ।। षष्ठी।। 







व्यसने मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति । 
विनये भृत्यपरीक्षा दानपरीक्षा च दुर्भिक्षे ।। सप्तमी ।।





आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर । 
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ।। सम्बोधनम् ।।





रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ।।

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