name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> ९. विभक्तिमाला ।( सर्वेषाम् स्वस्तिर्भवतु ।सभी के लिए सुख और समृद्धि हो।") BY SUJEET SIR,9709622037,8340763695, ARARIA, BIHAR. सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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🌍 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) – 2030 का विजन📊 SDGs: विश्व विकास का रोडमैप🇮🇳 SDGs और भारत की प्रगति📘 SDGs: एक संक्षिप्त अध्ययन🎯 SDGs – लक्ष्य, महत्व और स्थिति📍 SDGs Index: भारत और बिहार🌱 सतत विकास: भविष्य की दिशा

🌍 SDGs क्या हैं? (हिंदी में) SDGs (Sustainable Development Goals) यानी सतत विकास लक्ष्य हैं, जिन्हें United Nations ने 2015 में तय किया। 👉 इनका मुख्य उद्देश्य है: गरीबी खत्म करना शिक्षा, स्वास्थ्य सुधारना पर्यावरण की रक्षा करना सभी के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना 📌 SDGs के 17 लक्ष्य (संक्षेप में) गरीबी समाप्त करना भूख खत्म करना अच्छा स्वास्थ्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लैंगिक समानता स्वच्छ जल और स्वच्छता सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा रोजगार और आर्थिक विकास उद्योग और नवाचार असमानता कम करना टिकाऊ शहर जिम्मेदार उपभोग जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई जल जीवन की रक्षा स्थल जीवन की रक्षा शांति और न्याय वैश्विक साझेदारी 📊 भारत में SDG Index (2023–24) यह रिपोर्ट NITI Aayog जारी करता है। भारत का कुल स्कोर: 71 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. टॉप राज्य: केरल, उत्तराखंड नीचे वाले राज्य: बिहार, झारखंड 📍 बिहार का SDG रैंक रैंक: 36वां (सबसे नीचे) स्कोर: 57 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. +1 कैटेगरी: Performer (50–64) 👉 इसका मतलब: बिहार में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी बाकी राज्यों से पीछे है।...

९. विभक्तिमाला ।( सर्वेषाम् स्वस्तिर्भवतु ।सभी के लिए सुख और समृद्धि हो।") BY SUJEET SIR,9709622037,8340763695, ARARIA, BIHAR.

९. विभक्तिमाला ।


धर्मो जयति नाधर्मः, सत्यं जयति नानृतम् ।
क्षमा जयति न क्रोधो, देवो जयति नासुरः ।। प्रथमा ।।






वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । 
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।। द्वितीया ।।






 काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् । 
व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ।। तृतीया ।।






विद्या विवादाय धनं मदाय खलस्य शक्तिः परपीडनाय । साधोस्तु सर्वं विपरीतमेतत् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ।।चतुर्थी।।



 तैलाद्रक्षेद् जलाद्रक्षेद् रक्षेत् शिथिलबन्धनात् । 
मूर्खहस्ते न दातव्यम् एवं वदति पुस्तकम् ।। पञ्चमी ।।






नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुणः । 
गुणस्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा ।। षष्ठी।। 







व्यसने मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति । 
विनये भृत्यपरीक्षा दानपरीक्षा च दुर्भिक्षे ।। सप्तमी ।।





आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर । 
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ।। सम्बोधनम् ।।





रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ।।

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