name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> #संसार में दो तरह के पेड़ होते हैं, जीवन के लिए कुछ अनमोल अनुभव, thinking power, motivational thought....प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने और कार्य में परिणित करने की बात है..✍️🏾 सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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उत्प्रेक्षा अलङ्कार क्या है? परिभाषा, पहचान, उदाहरण और महत्वपूर्ण MCQ | संस्कृत अलङ्कार

उत्प्रेक्षा अलङ्कार उत्प्रेक्षा अलङ्कार की परिभाषा जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति में किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति की सम्भावना अथवा कल्पना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलङ्कार होता है। उत्प्रेक्षा अलङ्कार की पहचान उत्प्रेक्षा में प्रायः इव, मन्ये, शङ्के, नूनम्, प्रायः आदि शब्दों का प्रयोग मिलता है। सरल ट्रिक उपमा = समानता उत्प्रेक्षा = सम्भावना या कल्पना यदि वाक्य में “मानो”, “ऐसा लगता है”, “शायद ऐसा हो” जैसी कल्पना का भाव हो, तो उत्प्रेक्षा अलङ्कार होने की सम्भावना रहती है। उदाहरण मुखं चन्द्र इव मन्ये। अर्थ—मैं मुख को मानो चन्द्रमा ही समझता हूँ। यहाँ मुख में चन्द्रमा की कल्पना की गई है, इसलिए उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। महत्वपूर्ण प्रश्न “लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु” पद्यांश में कौन-सा अलङ्कार है? (A) उत्प्रेक्षा (B) उपमा (C) अर्थान्तरन्यास (D) रूपक उत्तर — (A) उत्प्रेक्षा उत्प्रेक्षा अलङ्कार – 20 महत्वपूर्ण MCQ 1. उत्प्रेक्षा अलङ्कार में मुख्यतः किसकी प्रधानता होती है? (A) समानता (B) सम्भावना या कल्पना (C) विरोध (D) अतिशयोक्ति उत्तर: (B) सम्भावना या कल्पना 2. उत्प्रेक्षा अलङ्कार में प्रायः ...

#संसार में दो तरह के पेड़ होते हैं, जीवन के लिए कुछ अनमोल अनुभव, thinking power, motivational thought....प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने और कार्य में परिणित करने की बात है..✍️🏾




🌳 संसार में दो प्रकार के पेड़ पौधे होते हैं






🌳प्रथम: अपना फल स्वयं दे देते हैं,
🍎जैसे:- सेब, आम, अमरुद, केला इत्यादि.








🌿द्वितीय : अपना फल छिपाकर रखते हैं,
🥔जैसे:- आलू, अदरक, प्याज इत्यादि.






🍑जो फल अपने आप दे देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और ऐसे वृक्ष फिर से फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं.






🥕किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं, उनका वजूद ही खत्म हो जाता हैं.





☝️ठीक इसी प्रकार… जो व्यक्ति अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में समाज के उत्थान में लगा देते हैं, उनका सभी ध्यान रखते हैं और वे मान-सम्मान पाते है.





☝️वही दूसरी ओर… जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, किसी की सहायता से मुख मोड़े रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते है, अर्थात् समय रहते ही भुला दिये जाते है.




प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने और कार्य में परिणित करने की बात है..✍️🏾

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