name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> राष्ट्रकवि दिनकर , साहित्य, रश्मि रथी (देखने में देवता सदृश लगता है ,बंद कमरे में बैठकर गलत हुक्म लिखता है, जी पापी को गुण नहीं गोत्र प्यार हो, समझो उसी ने हमें मारा है ।)By SUJEET SIR 9709622037,8340763695 ,ARARIA,BIHAR सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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🌍 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) – 2030 का विजन📊 SDGs: विश्व विकास का रोडमैप🇮🇳 SDGs और भारत की प्रगति📘 SDGs: एक संक्षिप्त अध्ययन🎯 SDGs – लक्ष्य, महत्व और स्थिति📍 SDGs Index: भारत और बिहार🌱 सतत विकास: भविष्य की दिशा

🌍 SDGs क्या हैं? (हिंदी में) SDGs (Sustainable Development Goals) यानी सतत विकास लक्ष्य हैं, जिन्हें United Nations ने 2015 में तय किया। 👉 इनका मुख्य उद्देश्य है: गरीबी खत्म करना शिक्षा, स्वास्थ्य सुधारना पर्यावरण की रक्षा करना सभी के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना 📌 SDGs के 17 लक्ष्य (संक्षेप में) गरीबी समाप्त करना भूख खत्म करना अच्छा स्वास्थ्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लैंगिक समानता स्वच्छ जल और स्वच्छता सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा रोजगार और आर्थिक विकास उद्योग और नवाचार असमानता कम करना टिकाऊ शहर जिम्मेदार उपभोग जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई जल जीवन की रक्षा स्थल जीवन की रक्षा शांति और न्याय वैश्विक साझेदारी 📊 भारत में SDG Index (2023–24) यह रिपोर्ट NITI Aayog जारी करता है। भारत का कुल स्कोर: 71 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. टॉप राज्य: केरल, उत्तराखंड नीचे वाले राज्य: बिहार, झारखंड 📍 बिहार का SDG रैंक रैंक: 36वां (सबसे नीचे) स्कोर: 57 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. +1 कैटेगरी: Performer (50–64) 👉 इसका मतलब: बिहार में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी बाकी राज्यों से पीछे है।...

राष्ट्रकवि दिनकर , साहित्य, रश्मि रथी (देखने में देवता सदृश लगता है ,बंद कमरे में बैठकर गलत हुक्म लिखता है, जी पापी को गुण नहीं गोत्र प्यार हो, समझो उसी ने हमें मारा है ।)By SUJEET SIR 9709622037,8340763695 ,ARARIA,BIHAR

 रामधारी सिंह दिनकर: 

याचना नहीं, अब रण होगा

   





वर्षों तक वन में घूम-घूम,

बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,

सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,

पांडव आये कुछ और निखर।

सौभाग्य न सब दिन सोता है,

देखें, आगे क्या होता है।    








मैत्री की राह बताने को,

सबको सुमार्ग पर लाने को,

दुर्योधन को समझाने को,

भीषण विध्वंस बचाने को,

भगवान् हस्तिनापुर आये,

पांडव का संदेशा लाये।

  








कृष्ण की चेतावनी

‘दो न्याय अगर तो आधा दो,

पर, इसमें भी यदि बाधा हो,

तो दे दो केवल पाँच ग्राम,

रक्खो अपनी धरती तमाम।

हम वहीं खुशी से खायेंगे,

परिजन पर असि न उठायेंगे!








दुर्योधन वह भी दे ना सका,

आशीष समाज की ले न सका,

उलटे, हरि को बाँधने चला,

जो था असाध्य, साधने चला।

जब नाश मनुज पर छाता है,

पहले विवेक मर जाता है।







कृष्ण की चेतावनी

हरि ने भीषण हुंकार किया,

अपना स्वरूप-विस्तार किया,

डगमग-डगमग दिग्गज डोले,

भगवान् कुपित होकर बोले-

‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,

हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।








यह देख, गगन मुझमें लय है,

यह देख, पवन मुझमें लय है,

मुझमें विलीन झंकार सकल,

मुझमें लय है संसार सकल।

अमरत्व फूलता है मुझमें,

संहार झूलता है मुझमें।







कृष्ण की चेतावनी

‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल,

भूमंडल वक्षस्थल विशाल,

भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं,

मैनाक-मेरु पग मेरे हैं।

दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,

सब हैं मेरे मुख के अन्दर।








‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,

मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,

चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,

नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर।

शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,

शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र।







कृष्ण की चेतावनी

‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,

शत कोटि विष्णु जलपति, धनेश,

शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,

शत कोटि दण्डधर लोकपाल।

जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें,

हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।







‘भूलोक, अतल, पाताल देख,

गत और अनागत काल देख,

यह देख जगत का आदि-सृजन,

यह देख, महाभारत का रण,

मृतकों से पटी हुई भू है,

पहचान, इसमें कहाँ तू है।






कृष्ण की चेतावनी

‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख,

पद के नीचे पाताल देख,

मुट्ठी में तीनों काल देख,

मेरा स्वरूप विकराल देख।

सब जन्म मुझी से पाते हैं,

फिर लौट मुझी में आते हैं।








‘जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,

साँसों में पाता जन्म पवन,

पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,

हँसने लगती है सृष्टि उधर!

मैं जभी मूँदता हूँ लोचन,

छा जाता चारों ओर मरण।






कृष्ण की चेतावनी

‘बाँधने मुझे तो आया है,

जंजीर बड़ी क्या लाया है?

यदि मुझे बाँधना चाहे मन,

पहले तो बाँध अनन्त गगन।

सूने को साध न सकता है,

वह मुझे बाँध कब सकता है?






‘हित-वचन नहीं तूने माना,

मैत्री का मूल्य न पहचाना,

तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,

अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।

याचना नहीं, अब रण होगा,

जीवन-जय या कि मरण होगा।






कृष्ण की चेतावनी

‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर,

बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,

फण शेषनाग का डोलेगा,

विकराल काल मुँह खोलेगा।

दुर्योधन! रण ऐसा होगा।

फिर कभी नहीं जैसा होगा।






‘भाई पर भाई टूटेंगे,

विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,

वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,

सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।

आखिर तू भूशायी होगा,

हिंसा का पर, दायी होगा।’






कृष्ण की चेतावनी

थी सभा सन्न, सब लोग डरे,

चुप थे या थे बेहोश पड़े।

केवल दो नर ना अघाते थे,

धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।

कर जोड़ खड़े प्रमुदित,

निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’!

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