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ब्रिटिशकालीन भूमि-राजस्व व्यवस्थाएँ 1793–1822 | महालवाड़ी, रैयतवाड़ी एवं स्थायी बंदोबस्त | BPSC, SSC GD एवं Bihar Police

ब्रिटिशकालीन भूमि-राजस्व व्यवस्थाएँ: सम्पूर्ण जानकारी ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में भू-राजस्व वसूली के लिए तीन प्रमुख व्यवस्थाएँ लागू की गईं— 1. स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) - वर्ष: 1793 ई. - प्रवर्तक: लॉर्ड कॉर्नवालिस - प्रमुख क्षेत्र: बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा - विशेषता: जमींदारों के माध्यम से भू-राजस्व की वसूली की जाती थी। 2. रैयतवाड़ी व्यवस्था (Ryotwari System) - वर्ष: 1820 ई. (मद्रास में) - प्रमुख व्यक्ति: थॉमस मुनरो एवं अलेक्जेंडर रीड - प्रमुख क्षेत्र: मद्रास एवं बॉम्बे के कुछ हिस्से - विशेषता: सरकार सीधे किसानों (रैयतों) से भू-राजस्व वसूलती थी। 3. महालवाड़ी व्यवस्था (Mahalwari System) - वर्ष: 1822 ई. - प्रवर्तक: होल्ट मैकेंजी - प्रमुख क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी प्रांत, पंजाब एवं मध्य भारत के कुछ हिस्से - विशेषता: गाँव या महाल को राजस्व निर्धारण की इकाई माना गया। परीक्षा उपयोगी तथ्य: 1793 — स्थायी बंदोबस्त; 1820 — रैयतवाड़ी; 1822 — महालवाड़ी। ब्रिटिशकालीन भूमि-राजस्व व्यवस्थाएँ: 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQ) 1. स्थायी बंदोबस्त की शुरुआत किसने की थी? (A) लॉर्ड डलहौजी...

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