Class: 10th & 12th | BSEB | 2027 | Marks: 10,विषय: हिन्दी (निबंध)शीर्षक: प्रदूषणकक्षा: 10वीं / 12वींबोर्ड: BSEBवर्ष: 2027अंक: 10 Marksप्रकार: वर्णनात्मक निबंध...
प्रदूषण
भूमिका :
प्रदूषण आज के समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। जब प्राकृतिक पर्यावरण में हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं और उसकी शुद्धता नष्ट हो जाती है, तो उसे प्रदूषण कहते हैं। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे मानव जीवन, पशु-पक्षियों और प्रकृति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
जल प्रदूषण :
जब नदियों, तालाबों, झीलों और समुद्र के जल में गंदगी, रासायनिक पदार्थ, कचरा या विषैले तत्व मिल जाते हैं, तो जल प्रदूषण होता है। कारखानों का अपशिष्ट, सीवेज, प्लास्टिक और कीटनाशक इसके मुख्य कारण हैं। जल प्रदूषण से जल पीने योग्य नहीं रहता और अनेक बीमारियाँ फैलती हैं।
वायु प्रदूषण :
वायु प्रदूषण तब होता है जब हवा में धूल, धुआँ, गैसें और हानिकारक कण मिल जाते हैं। वाहनों का धुआँ, कारखानों की गैसें, जंगलों की कटाई और जलने वाली वस्तुएँ इसके मुख्य कारण हैं। इससे श्वसन संबंधी रोग, दमा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
ध्वनि प्रदूषण :
अत्यधिक और अनियंत्रित शोर ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। लाउडस्पीकर, वाहनों का हॉर्न, मशीनों की आवाज़ और पटाखों से यह उत्पन्न होता है। ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव, नींद में बाधा और सुनने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
प्रदूषण का निदान :
प्रदूषण को कम करने के लिए हमें पेड़-पौधे लगाने चाहिए, प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए और स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। उद्योगों में अपशिष्ट को शुद्ध करके ही बाहर निकालना चाहिए। वाहनों का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग करना आवश्यक है। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए अनावश्यक शोर से बचना चाहिए।
उपसंहार :
प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान हम सभी के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। यदि हम अभी से सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इसलिए हमें पर्यावरण की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझना चाहिए।
कक्षा: 10वीं / 12वीं
बोर्ड: BSEB
वर्ष: 2027
अंक: 10 Marks
प्रकार: वर्णनात्मक निबंध
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