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GSI (Geological Survey of India) | भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण | स्थापना, मुख्यालय एवं महत्वपूर्ण तथ्य | BPSC,

GSI — Geological Survey of India (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण) स्थापना: 1851 मुख्यालय: कोलकाता, पश्चिम बंगाल मुख्य कार्य: भारत की भूवैज्ञानिक संरचना, खनिज संसाधन, भूकंप, भू-स्खलन आदि का सर्वेक्षण और अध्ययन। परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु GSI का पूरा नाम: Geological Survey of India हिंदी नाम: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण स्थापना वर्ष: 1851 मुख्यालय: कोलकाता यह खान मंत्रालय (Ministry of Mines) के अधीन कार्य करता है। GSI भारत के खनिज संसाधनों और भूवैज्ञानिक मानचित्रण से संबंधित महत्वपूर्ण संस्था है। 10 महत्वपूर्ण MCQ 1. GSI का पूरा नाम क्या है? A. Geological Survey of India B. General Survey of India C. Geological Science of India D. इनमें से कोई नहीं उत्तर: A 2. Geological Survey of India की स्थापना कब हुई? A. 1851 B. 1881 C. 1901 D. 1947 उत्तर: A 3. GSI का मुख्यालय कहाँ है? A. दिल्ली B. मुंबई C. कोलकाता D. पटना उत्तर: C 4. GSI किस मंत्रालय के अधीन है? A. पर्यावरण मंत्रालय B. खान मंत्रालय C. गृह मंत्रालय D. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय उत्तर: B 5. GSI मुख्य रूप से किससे संबंधित है...

परस्मैपदी, आत्मनेपदी एवं उभयपदी धातुएँ

📊 परस्मैपदी vs आत्मनेपदी
🔹 1. परस्मैपदी
👉 परिभाषा:
जिस धातु के फल का लाभ दूसरे (पर) को होता है, वह परस्मैपदी कहलाती है।




👉 प्रत्यय (ending):
ति, तः, अन्ति
सि, थः, थ
मि, वः, मः
👉 उदाहरण:
√पठ् → पठति (वह पढ़ता है – दूसरों के लिए/सामान्य क्रिया)
√गम् → गच्छति (वह जाता है)





🔹 2. आत्मनेपदी
👉 परिभाषा:
जिस धातु के फल का लाभ स्वयं (अपने) को होता है, वह आत्मनेपदी कहलाती है।
👉 प्रत्यय (ending):
ते, आताम्, अन्ते
से, आथाम्, ध्वे
ए, वहे, महे
👉 उदाहरण:
√लभ् → लभते (वह प्राप्त करता है – अपने लिए)
√सेव् → सेवते (वह सेवा करता है)




🎯 मुख्य अंतर (एक नजर में):
बिंदु
परस्मैपदी
आत्मनेपदी
फल
दूसरे के लिए
अपने लिए
उदाहरण
पठति, गच्छति
लभते, सेवते
प्रत्यय
ति आदि
ते आदि




🧠 आसान ट्रिक:
👉 “ति” दिखे → परस्मैपदी
👉 “ते” दिखे → आत्मनेपदी





📖 उभयपदी धातु क्या है?
👉 परिभाषा:
जो धातु परस्मैपदी और आत्मनेपदी दोनों रूपों में प्रयोग होती है, उसे उभयपदी धातु कहते हैं।



🧠 सरल भाषा में:
👉 एक ही धातु कभी “ति” (परस्मैपदी) और कभी “ते” (आत्मनेपदी) दोनों रूपों में आती है।




✍️ उदाहरण:
🔹 √नी (ले जाना)
नयति (परस्मैपदी)
नयते (आत्मनेपदी)
🔹 √कृ (करना)
करोति (परस्मैपदी)
कुरुते (आत्मनेपदी)




📊 तीनों का सार (Revision Table):

परस्मैपदी
ति
पठति, गच्छति
आत्मनेपदी



ते
लभते, सेवते



उभयपदी
ति + ते दोनों
करोति/कुरुते

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