name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> संस्कृत में श्लोक, विद्यामहत्वम् (IMPORTANCE OF KNOWLEDG( येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ।).970909622037,8340763695, ARARIA, BIHAR. सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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🌍 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) – 2030 का विजन📊 SDGs: विश्व विकास का रोडमैप🇮🇳 SDGs और भारत की प्रगति📘 SDGs: एक संक्षिप्त अध्ययन🎯 SDGs – लक्ष्य, महत्व और स्थिति📍 SDGs Index: भारत और बिहार🌱 सतत विकास: भविष्य की दिशा

🌍 SDGs क्या हैं? (हिंदी में) SDGs (Sustainable Development Goals) यानी सतत विकास लक्ष्य हैं, जिन्हें United Nations ने 2015 में तय किया। 👉 इनका मुख्य उद्देश्य है: गरीबी खत्म करना शिक्षा, स्वास्थ्य सुधारना पर्यावरण की रक्षा करना सभी के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना 📌 SDGs के 17 लक्ष्य (संक्षेप में) गरीबी समाप्त करना भूख खत्म करना अच्छा स्वास्थ्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लैंगिक समानता स्वच्छ जल और स्वच्छता सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा रोजगार और आर्थिक विकास उद्योग और नवाचार असमानता कम करना टिकाऊ शहर जिम्मेदार उपभोग जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई जल जीवन की रक्षा स्थल जीवन की रक्षा शांति और न्याय वैश्विक साझेदारी 📊 भारत में SDG Index (2023–24) यह रिपोर्ट NITI Aayog जारी करता है। भारत का कुल स्कोर: 71 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. टॉप राज्य: केरल, उत्तराखंड नीचे वाले राज्य: बिहार, झारखंड 📍 बिहार का SDG रैंक रैंक: 36वां (सबसे नीचे) स्कोर: 57 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. +1 कैटेगरी: Performer (50–64) 👉 इसका मतलब: बिहार में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी बाकी राज्यों से पीछे है।...

संस्कृत में श्लोक, विद्यामहत्वम् (IMPORTANCE OF KNOWLEDG( येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ।).970909622037,8340763695, ARARIA, BIHAR.



मातेवरक्षति पितेन हिते नियुक्ते कान्तेव चाभिरमयत्यपनीय खेदम्।लक्ष्मी तनोति वितनोति च दिक्षु कीर्तिम् किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या ।।१।।






अर्थ:-
विद्या माता की तरह रक्षा करती है ,पिता की तरह भरण पोषण करती है। पत्नी की तरह सुख-दुख में साथ देती है ।धन को देती है, यश को चारों दिशाओं में फैलती है ।इसके द्वारा क्या प्राप्त नहीं किया जा सकता है।विद्या कल्पना  वृक्ष की तरह है ,इसका द्वारा इच्छित  फल प्राप्त कर सकते हैं।







 कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी। प्रवासे मातृसदृशी विद्या गुप्तधनं स्मृतम् ।।२।।







अर्थ :-
विद्या कामधेनु गाय की तरह है ,विद्या फल देने वाली होती है । यह विदेश में माता की तरह मदद करती है,तथा गुप्त(छुपा हुआ) सदा याद रखने योग्य है।





 न चौरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारी। व्यये कृते वर्धते एव नित्यं विद्याधनम् सर्वधनं प्रधानम् ॥३॥






अर्थ:-
विद्या रूपी धन को ना चोर चुरा सकता है ,ना राजा हरण कर सकता है । ना भाई बांट सकता है ,इसमें वजन भी नहीं होता है ।विद्या को नित्य रोज खर्च करने पर  बढ़ता है ,जबकि दूसरे धन को रोज खर्च करने पर घटता है, इसी विशेषता के कारण विद्या को सभी धनों में श्रेष्ठ माना गया है।






 अन्नदानं परं दानं विद्यादानं ततः परम्। अन्नेन क्षणिका तृप्तिः यावज्जीवं च विद्यया ।।४।। 






अर्थ : अन्नदान को बड़ा दान कहा गया है ,लेकिन विद्यादान को उससे भी बड़ा दान कहा गया है ।क्योंकि अन्न दान करने और प्राप्त  करने वाले को कुछ छन तक तृप्ति( संतुष्टि )मिलता है ,जबकि विद्यादान करने वाले और पाने वाले को जीवन भर सुख और शांति प्राप्त होती है।




विद्याधनं श्रेष्ठधनं तन्मूलमितरधनम्। दानेन वर्धते नित्यं न भारायच नीयते ।।५।।





अर्थ :-विद्या रूपी धन को श्रेष्ठ कहा गया है, क्योंकि विद्या से ही सभी प्रकार के धन प्राप्त होते है।अर्थात विद्या सभी धनों के जड़ में छिपा है। विद्या को नित्य खर्च करने पर बढ़ता है ,जबकि दूसरे धनों को नित्य खर्च करने से घटता है ,विद्या को कहीं ले जाने या आने में भार महसूस नहीं होता है ,इसी कारण विद्या को सभी धनों में श्रेष्ठ कहा गया है।

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