name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> BSEB CLASS 10 HINDI CHAPTER 1 श्रम विभाजन और जाति-प्रथा ,subjective question( WHAT COMES EASY WON'T LAST..., WHAT LASTS WON'T COMES EASY...) BY:-SUJEET SIR 834076369,'9709622037,ARARIA,BIHAR. सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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🌍 SDGs क्या हैं? (हिंदी में) SDGs (Sustainable Development Goals) यानी सतत विकास लक्ष्य हैं, जिन्हें United Nations ने 2015 में तय किया। 👉 इनका मुख्य उद्देश्य है: गरीबी खत्म करना शिक्षा, स्वास्थ्य सुधारना पर्यावरण की रक्षा करना सभी के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना 📌 SDGs के 17 लक्ष्य (संक्षेप में) गरीबी समाप्त करना भूख खत्म करना अच्छा स्वास्थ्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लैंगिक समानता स्वच्छ जल और स्वच्छता सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा रोजगार और आर्थिक विकास उद्योग और नवाचार असमानता कम करना टिकाऊ शहर जिम्मेदार उपभोग जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई जल जीवन की रक्षा स्थल जीवन की रक्षा शांति और न्याय वैश्विक साझेदारी 📊 भारत में SDG Index (2023–24) यह रिपोर्ट NITI Aayog जारी करता है। भारत का कुल स्कोर: 71 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. टॉप राज्य: केरल, उत्तराखंड नीचे वाले राज्य: बिहार, झारखंड 📍 बिहार का SDG रैंक रैंक: 36वां (सबसे नीचे) स्कोर: 57 � Chronicle Publications Pvt. Ltd. +1 कैटेगरी: Performer (50–64) 👉 इसका मतलब: बिहार में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी बाकी राज्यों से पीछे है।...

BSEB CLASS 10 HINDI CHAPTER 1 श्रम विभाजन और जाति-प्रथा ,subjective question( WHAT COMES EASY WON'T LAST..., WHAT LASTS WON'T COMES EASY...) BY:-SUJEET SIR 834076369,'9709622037,ARARIA,BIHAR.




BIHAR BOARD MATRIC HINDI 
CHAPTER 1 
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
 QUESTION 2025

1.लेखक किस विंडवना कि बात करते है ? वींड्वना का स्वरुप क्या है ? 
उतर:- लेखक भीमराव अम्बेडकर जी वींड्वना कि बात करते हुए कहते है कि इस युग मे जातिवाद के पोषको कि कमी नहींहै जिसका स्वरुप है कि जतिप्रथा श्रम विभाजन के साथ- साथ श्रमिक विभाजन का भी रुप ले रखा है , जो अस्वभविक है।










2.जातिवाद के पोषक उसके पक्ष मे क्या तर्क देते है ? 
उतर:- जातिवाद के पोषको का तर्क है कि आधुनिक सभ्य समाज कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन आवश्यक मानता है और जाति प्रथा श्रम विभाजन का ही रूप है इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।










3.जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्को पर लेखक की प्रमुख आपत्तियाँ क्या है ?
उतर:- जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्क पर लेखक के प्रमुख आपतियाँ इस प्रकार है कि जाति प्रथा श्रम विभाजन का रूप ले लिया है और किसी सभ्य समाज में श्रम विभाजन व्यवस्था श्रमिकों के विभिन्न पहलुओं में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करता है ।









4.जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती है ?
उतर:- भारतीय समाज में जातिवाद के आधार पर श्रम विभाजन और अस्वाभाविक है क्योंकि जातिगत श्रम विभाजन श्रमिकों की रुचि अथवा कार्यकुशलता के आधार पर नहीं होता, बल्कि माता के गर्भ में ही श्रम विभाजन कर दिया जाता है जो विवशता ,अरुचिपूर्ण होने के कारण गरीबी और अकर्मव्यता को बढ़ाने वाला है ।








5.जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?
उतर:- जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण है क्योंकि भारतीय समाज में श्रम विभाजन का आधार जाति है चाहे श्रमिक कार्य कुशल हो या नहीं उस कार्य में रुचि रखता हो या नहीं इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जब श्रमिकों कार्य करने में न दिल लगे ना दिमाग तो कोई कार्य कुशलता पूर्वक कैसे प्राप्त कर सकता है यही कारण है कि भारत में जतिप्रथा बेरोजगारी का प्रत्यक्ष और प्रमुख कारण बना हुआ है ।









6.लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मनते है, और क्यो ?
उतर:- लेखक भीमराव अंबेडकर आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या लोगों का निर्धारित कार्य को मानते हैं ,क्योंकि अरुचि और विवस्ता वस मनुष्य काम को टालने लगता है और कम काम करने के लिए प्रेरित हो जाता है। ऐसी स्थिति में जहां काम करने में नद दिल लगे ना दिमाग तो कोई कुशलता कैसे प्राप्त कर सकता है ।










7.लेखक ने पाठ के किन पहलुओं में जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है ?
उतर:- लेखक ने पाठ के विभिन्न पहलुओं में जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है जो इस प्रकार है, अस्वाभाविक श्रम विभाजन ,बढ़ती बेरोजगारी, अरुचि और विवस्ता में श्रम का चुनाव ,गतिशील एवं आदर्श समाज ,तथा वास्तविक लोकतंत्र का स्वरूप, आदि ।










8.सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओ को आवश्यक माना है ?
उतर:- सच्चे लोकतंत्र कि स्थापना के लिए लेखक अनेक विशेषताओं को आवश्यक माना है। बहू विध हितो में सब का भाग समान होना चाहिए सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग होनी चाहिए तात्पर्य है कि हमें समाज में दूध और पानी के मिश्रण की तरह भाईचारे की भावना होनी चाहिए हमें साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान होनी चाहिए ?









9.श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ पाठ का सारांश लिखें।
उतर:-आज के युग में भी जाति-प्रथा की वकालत सबसे बड़ी बिडंबना है। ये लोग तर्क देते हैं कि जाति-प्रथा श्रम-विभाजन का ही एक रूप है। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि श्रम-विभाजन श्रमिक-विभाजन नहीं है। श्रम-विभाजन निस्संदेह आधुनिक युग की आवश्यकता है, श्रमिक-विभाजन नहीं। जाति-प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन और इनमें ऊँच-नीच का भेद करती है।









वस्तुत: जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता क्योंकि श्रम-विभाजन मनुष्य की रूचि पर होता है, जबकि जाति-प्रथा मनुष्य पर जन्मना पेशा थोप देती है। मनुष्य की रूचि-अरूचि इसमें कोई मायने नहीं रखती। ऐसी हालत में व्यक्ति अपना काम टालू ढंग से करता है, न कुशलता आती है न श्रेष्ठ उत्पादन होता है। चूँकि व्यवसाय में, ऊँच-नीच होता रहता है, अतः जरूरी है पेशा बदलने का विकल्प। चूँकि जाति-प्रथा में पेशा बदलने की गुंजाइश नहीं है,






इसलिए यह प्रथा गरीबी और उत्पीडन तथा बेरोजगारी को जन्म देती है। भारत की गरीबी और बेरोजगारी के मुल में जाति-प्रथा ही है। अतः स्पष्ट है कि हमारा समाज आदर्श समाज नहीं है। आदर्श समाज में । बहविध हितों में सबका भाग होता है। इसमें अवाध संपर्क के अनेक साधन एवं अवसर उपलब्ध होते हैं। लोग दूध-पानी की तरह हिले-मिले रहते हैं। इसी का नाम लोकतंत्र है। लोकतंत्र मूल रूप से सामूहिक जीवन-चर्या और सम्मिलित अनुभवों के आदान प्रदान का नाम है


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