name="google-site-verification" content="XXXXXX" /> #संस्कृत #प्रत्यय #प्रत्यय के प्रकार #सभी परीक्षा में उपयोगी (“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”)By Sujeet sir,9709622037,8340763695,Araria,Bihar . सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

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Bihar Special GK – बिहार की उत्तरी नदियाँ: सम्पूर्ण जानकारी + 100 महत्वपूर्ण MCQ | BPSC, Bihar Police & Bihar Teacher

बिहार की उत्तरी नदियाँ: सम्पूर्ण जानकारी | Theory + 100 MCQ बिहार की उत्तरी नदियाँ – महत्वपूर्ण Theory बिहार की उत्तरी नदियाँ मुख्यतः हिमालय से निकलकर बिहार के उत्तरी मैदान में प्रवेश करती हैं। इन नदियों में वर्षा तथा हिमालय से आने वाले जल के कारण पूरे वर्ष पानी पाया जाता है। बिहार की उत्तरी नदियाँ राज्य की कृषि, सिंचाई और जल संसाधनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 1. गंगा नदी गंगा बिहार के मध्य भाग से होकर पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है और बिहार को लगभग दो भागों—उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार—में विभाजित करती है। 2. घाघरा नदी घाघरा नदी हिमालय क्षेत्र से निकलती है और बिहार के पश्चिमी भाग में गंगा से मिलती है। यह गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी है। 3. गंडक नदी गंडक नदी का उद्गम हिमालय क्षेत्र में नेपाल में माना जाता है। इसे नेपाल में नारायणी नाम से भी जाना जाता है। यह बिहार में प्रवेश करने के बाद गंगा में मिलती है। 4. बूढ़ी गंडक बूढ़ी गंडक का उद्गम बिहार के पश्चिमी/उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में माना जाता है। यह उत्तर बिहार की महत्वपूर्ण नदी है और आगे चलकर गंगा में मिलती है। 5. बागमती नदी बागमती न...

#संस्कृत #प्रत्यय #प्रत्यय के प्रकार #सभी परीक्षा में उपयोगी (“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”)By Sujeet sir,9709622037,8340763695,Araria,Bihar .







प्रत्यय-
 प्रति + अय् + अच् अर्थात् जो वर्णसमूह किसी धातु या शब्द के अन्त में जुड़कर नए अर्थ की प्रतीति कराते हैं, उस वर्णसमूह को प्रत्यय कहते हैं।






मुख्य रूप से प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं-
कृत् प्रत्यय
तद्धित प्रत्यय







 धातु के अन्त में लगने वाले प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं-







(i) कृत् प्रत्यय - क्त्वा, ल्यप्, तुमुन्, तव्यत्,
अनीयर् आदि ।






(ii) तिङ् प्रत्यय - तिप् तस् झि आदि 18 प्रत्यय ।





1. क्त्वा प्रत्यय
जब एक ही कर्ता द्वारा एक कार्य की समाप्ति के बाद दूसरी क्रिया की जाती है, तो समाप्ति क्रिया में क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग होता है। इस प्रत्यय से बने हुए शब्द को पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं।









छात्रः पठित्वा गृहं गच्छति । ( छात्र पढ़कर घर जाता है)




























2. ल्यप् प्रत्यय
जब धातु से पहले कोई उपसर्ग होता है तो 'क्त्वा ' प्रत्यय के स्थान पर 'ल्यम्' आदेश हो जाता है।





 'क्त्वा' और 'ल्यप्' प्रत्ययों से बनने वाले
शब्द अव्यय होते हैं और दोनों प्रत्यय
'पूर्वकालिक कृदन्त ' है





(i) छात्रः आगत्य पठति (छात्र आकर पढ़ता है) 




(ii) मनुष्यः सर्वं विस्मृत्य सुखी भवति (मनुष्य सब कुछ भूलकर सुखी होता है)


















३. तुमुन् प्रत्यय

> 'के लिए' यह अर्थ बताना हो तो धातुओं से 'तुमुन्' प्रत्यय लगाया जाता है।

जैसे- पठितुम् (पढ़ने के लिए) गन्तुम् (जाने के लिए), क्रेतुम् ( खरीदने के लिए) आदि ।



' तुमुन् ' प्रत्यय से बने शब्द अव्यय होते हैं, अतः इनके रूप नहीं चलते।





कर्ता जिस कार्य के निमित्त कोई क्रिया करता है उसे निमित्तार्थक क्रिया कहते हैं, निमित्तार्थक क्रिया में ही 'तुमुन्'
प्रत्यय लगाया जाता है।














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